दीपक की टिम टिम है बाहर,
अन्दर घना कुहाँसा है !
बातों की किलकारी बाहर,
अन्दर बड़ी निराशा है !
सपने बड़े, बड़े हैं अपने,
तोड़े खड़े खड़े हैं सबने !
जीवन की चिंगारी बाहर,
अन्दर सभी धुंआ सा है!
मन का मीत, और मीत का मन,
जब सब कुछ हवा हवा सा है !
इस मन को समझाएं कैसे,
ये खुद ही बुझा बुझा सा है !
दीपक की टिम टिम है बाहर,
अन्दर घना कुहाँसा है !!
- शालिनी
१९ जुलाई २०१२
अन्दर घना कुहाँसा है !
बातों की किलकारी बाहर,
अन्दर बड़ी निराशा है !
सपने बड़े, बड़े हैं अपने,
तोड़े खड़े खड़े हैं सबने !
जीवन की चिंगारी बाहर,
अन्दर सभी धुंआ सा है!
मन का मीत, और मीत का मन,
जब सब कुछ हवा हवा सा है !
इस मन को समझाएं कैसे,
ये खुद ही बुझा बुझा सा है !
दीपक की टिम टिम है बाहर,
अन्दर घना कुहाँसा है !!
- शालिनी
१९ जुलाई २०१२