वक़्त है कम लम्बी मंजिल,
तुम्हें तेज कदम चलना होगा!
हे परम तपस्या के पथिकों,
तुम्हें नूतन पथ रचना होगा!!
जीवन के इस समरांगन में,
विजयी बनना अस्सं नहीं,
है साध्य किन्तु कुछ पल होंगे,
जिनका पहले से ज्ञान नहीं,
हो सफल तपस्या इसके हित,
प्रभु पलकों पे पलना होगा!!
हे परम तपस्या के पथिकों,
तुम्हें नूतन पथ रचना होगा!!
आनंद की अनमोल घड़ी,
कौड़ी के भाव न बिक जाये,
चलती सांसें अज्ञात मोड़ पर,
आकर के ना रुक जायें,
अनजान क्षितिज के कोने में,
वितान नया बुनना होगा!!
हे परम तपस्या के पथिकों,
तुम्हें नूतन पथ रचना होगा!!
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment